एनआरसी (NRC) क्या है | एनआरसी का फुल फॉर्म | एनआरसी के लिए आवश्यक दस्तावेज (सूची)

एनआरसी (NRC) क्या है

सरकार नागरिकता रजिस्टर तैयार करना चाहती है। इसके लिए एनआरसी की बात की जा रही है। एनआरसी को असम में लागू किया गया था। अब इसे पूरे देश में लागू करने की योजना पर काम चल रहा है। एनआरसी क्या है, इसमें किन लोगों को शामिल किया जाएगा, ऐसे कौन से लोग हैं, जो एनआरसी से बाहर हो सकते हैं, नागरिकता साबित करने के लिए किस तरह के दस्तावेजों को दिखाना होगा? इस तरह के तमाम पहलु हैं, जिन्हें इस आर्टिकल में साझा किया जा रहा है। पूरी जानकारी हासिल करने के लिए आर्टिकल पर अंत तक बने रहें।

एनआरसी का फुलफार्म

एनआरसी का फुल फार्म “नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन” है। एनआरसी के तहत लोगों को सूचीबद्ध किया जाएगा। सभी देशों के पास उनके नागरिकों का रजिस्टर है। उन्हें एक स्मार्ट कार्ड भी उपलब्ध कराए गए हैं, जिसकी वजह से उनकी पहचान देश के नागरिक के रूप में की जा सकती है। भारत सरकार भी इसी तर्ज पर अपने नागरिकों का रजिस्टर तैयार करना चाहती है, जिसकी तैयारी की जा रही है। 

असम में लागू है एनआरसी

नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन बिल फिलहाल असम में लागू है। असम में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी हैं, जो 1971 के बाद भारत आ गए थे। 1971 में पाकिस्तान के साथ हुई जंग में लाखों बांग्लादेशी अवैध तरीके से असम में घुस आए थे। इसके अलावा बड़ी संख्या ऐसे बांग्लादेशियों की भी है, जो रोजगार के लिए सीमा पार कर राज्य में दाखिल हो गए थे। सरकार का शुरू में दावा था कि असम में एक करोड़ से ज्यादा बांग्लादेशी घुसपैठिए हैं, लेकिन एनआरसी के बाद यह संख्या कम निकली।

19 लाख बांग्लादेशियों की हुई पहचान एनआरसी के तहत

सुप्रीम कोर्ट ने 2003 में असम के अंदर एनआरसी की वकालत की थी। इसके लिए एक कमेटी का गठन किया गया था। 2014 में भाजपा की सरकार बनने के बाद असम में एनआरसी को लागू कर दिया गया। इस प्रक्रिया को पूरी होने में चार साल से ज्यादा वक्त लग गए। 2017-18 में जब एनआरसी की पहली सूची बनी तो करीब 42 लाख लोग इससे बाहर हो गए। इसपर आपत्ति दाखिल की गई थी। बाद में नए सिरे से सूची तैयार करने का सिलसिला शुरू हुआ। 2019 में एनआरसी की फाइनल सूची बनकर तैयार हुई, जिसमें करीब 19 लाख बांग्लादेशियों की पहचान की गई।

फॉरेन ट्रिब्यूनल में अपील

असम में जो लोग अपनी नागरिकता साबित नहीं कर सके हैं, वे इसके लिए फॉरेन ट्रिब्यूनल में अपील कर सकते हैं। न्यायालय की देखरेख में यहां अपील की जा सकती है। अपील के दौरान लोगों को 1971 से पहले के उन दस्तावेजों को दिखाना होगा, जिससे उनकी नागरिकता साबित हो सके। चूंकि बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जिनके पास सभी जरूरी दस्तावेज होने के बाद भी उन्हें सूची से बाहर कर दिया गया है। इसमें पूर्व राष्ट्रपित के परिवार के लोग भी शामिल हैं। सेना में कमांडर के पद पर कार्यरत लोगों के परिवार के सदस्यों को भी सूची से बाहर कर दिया गया है। ऐसेस लोग फॉरेन ट्रिब्यूनल में नागरिकता के लिए अपील कर सकते हैं।

नागरिकता साबित करने के लिए क्या करें

  • रेस्ट ऑफ इंडिया यानी शेष भारत के लिए एनआरसी को फिलहाल लागू नहीं किया गया है। सरकार की तरफ से दस्तावेजों की सूची भी जारी नहीं की गई है।
  • असम में एनआरसी के दौरान जिस तरह के दस्तावेजों की मांग की गई थी, आपको उनकी जानकारी दी जा रही है।
  • सरकार द्वारा 14 तरह के दस्तावेजों की मांग की गई थी। नागरिकता साबित करने के लिए इन दस्तावेजों को दिखाना जरूरी था।
  • खास बात यह है कि सरकार की ओर से जारी दस्तावेजों की सूची को भी कई मसलों पर खारिज कर दिया गया था, जिसका मामला फॉरेन ट्रिब्यूनल में चल रहा है।

एनआरसी (NRC) सिद्ध करने के लिए जरूरी दस्तावेज

  • सिटिजनशिप सर्टिफिकेट
  • पासपोर्ट
  • एलआईसी पॉलिसी
  • सरकार द्वारा जारी लाइसेंस
  • निवास प्रमाणपत्र
  • बर्थ सर्टिफिकेट
  • जमीन के कागजात
  • एजूकेशनल सर्टिफिकेट
  • सर्विस रिकार्ड

डिटेंशन सेंटर में कौन जा सकता है

असम में एनआरसी से बाहर हुए 19 लाख लोगों पर डिटेंशन सेंटर भेजे जाने का खतरा मंडरा रहा है। ऐसे लोग, जो फॉरेन ट्रिब्यूनल में भी अपनी नागरिकता साबित नहीं कर सके हैं, उनके लिए कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है। सरकार पर निर्भर है कि वे ऐसे लोगों के खिलाफ किस तरह की कार्रवाई कर सकती है। माना जा रहा है कि इस तरह के लोगों को डिटेंशन सेंटर में भेजा जा सकता है। असम में बड़े पैमाने पर डिटेंशन सेंटर का निर्माण कराया जा रहा है। हालांकि सरकार ने किसी भी नए डिटेंशन सेंटर के निर्माण की सूचना को खारिज कर दिया है। एनआरसी से बाहर हुए लोग फिलहाल असम में ही रह रहे हैं। जब तक सरकार का इसपर अंतिम फैसला नहीं आ जाता है।

सीएए का क्या मतलब है

असम में एनआरसी का उद्देश्य बहुत तक सफल नहीं हुआ। एनआरसी से पहले सरकार का दावा था कि यहां एक करोड़ से ज्यादा घुसपैठिए हैं। एनआरसी के बाद यह संख्या 19 लाख पर सिमट गई। माना जाता है कि इसमें बहुसंख्यक ज्यादा है। सरकार के लिए यह चिंता का विषय है। माना जा रहा है कि उन्हें एनआरसी में शामिल करने के लिए ही सीएए को लाया जा रहा है। इस कानून के तहत मुसलमानों को छोड़ कर बाकी सभी को नागरिकता देने की बात की जा रही है।

एनआरसी से सम्बंधित जरूरी जानकारी

  • एनआरसी को पूरे देश में लागू करने के लिए फिलहाल कैबिनेट में चर्चा नहीं की गई है। प्रस्ताव भी नहीं लाया गया है।
  • लोकसभा और राज्यसभा, दोनों जगहों पर एनआरसी बिल को पेश नहीं किया गया है। सरकार फिलहाल इसकी कोशिश नहीं कर रही है।
  • दोनों सदनों में बिल पास होने के बाद ही नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन की प्रक्रिया को पूरे देश में शुरू किया जा सकता है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने अपने आर्डर में साफ कर दिया था कि एनआरसी को सिर्फ असम राज्य में ही लागू किया जा सकता है।

एनआरसी को लेकर सरकार का पक्ष

एनआरसी को लेकर देशभर में हुए बवाल को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकार का पक्ष रखा था। दिल्ली के रामलीला मैदान पर हुई रैली में उन्होंने साफ कर दिया था कि एनआरसी पर कोई बात नहीं हुई है। कैबिनेट में इसपर किसी तरह की चर्चा भी नहीं हुई है, इसलिए लोगों को घबराने की कोई जरूरत नहीं है। लोग शांत हो जाएं। उन्होंने सीएए को लेकर भी यह कहा था कि इसकी वजह से देश के किसी आदमी की नागरिकता नहीं जाएगी।

एनआरसी (NRC) के बारे में गृहमंत्री ने सदन में किये थे दावा

गृहमंत्री अमित शाह ने हालांकि संसद में कहा था कि एनआरसी को पूरे देश में लागू किया जाएगा। उन्होंने अलग-अलग रैलियों में भी इसका जिक्र किया था। यही वजह है कि देशभर में इसको लेकर विरोध-प्रदर्शन किया गया था। अंतराष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी चर्चा की जा रही थी। फिलहाल एनआरसी का पूरा मामला ठंडे बस्ते में है।

Anand Sivastava

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