एनपीआर (NPR) क्या होता है | एनपीआर का फुल फॉर्म | एनपीआर के लिए आवश्यक दस्तावेज (सूची)

एनपीआर (NPR) क्या है

सीएए और एनआरसी के साथ एनपीआर को लेकर भी तमाम तरह के सवाल खड़े किए जा रहे हैं। सरकार इसका पक्ष रख रही है, जबकि विपक्ष इसकी खामियों को उजागर कर रहा है। बहरहाल एनपीआर को मंजूरी मिल गई है और देशभर में इसे लागू भी कर दिया गया है। इस आर्टिकल में एनपीआर के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। एनपीआर क्या है, यह क्यों जरूरी है, सरकार का मकसद क्या है और इसकी वजह से देश को क्या फायदा होगा? इससे जुड़े सभी जरूरी पहलुओं को भी साझा किया जाएगा। पूरी जानकारी हासिल करने के लिए आर्टिकल पर अंत तक बने रहें।

एनपीआर का फुल फार्म

एनपीआर का फुल फार्म “राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (National Population Register)” है। एनपीआर के जरिए देश के नागरिकों की गिनती की जाएगी। यह आम प्रक्रिया है। यह जनगणना है, जो आमतौर पर हर दस साल में पूरी की जाती है। आजादी के बाद से ही जनगणना की जा रही है। सरकार को इसके जरिए यह पता चल पाता है कि देश के नागरिकों की संख्या कितनी है।

एनपीआर के तहत योजनाएं बनाने में होगी आसानी

एनपीआर या जनगणना का मकसद नागरिकों की संख्या को कलमबंद तो करना है ही, इसकी वजह से योजनाओं को बनाने और उन्हें क्रियांवित करने में आसानी होती है। सरकार को एनपीआर के जरिए महिलाओं, बुजुर्गों, युवाओं और बच्चों की संख्या की जानकारी मिल जाती है। इसके बाद योजनाओं को लागू करना आसान हो जाता है। सरकार को जब तक यह पता नहीं हो पाएगा कि महिलाओं की संख्या कितनी है, वह उनके लिए योजनाएं कैसे बना सकती है? इसी तरह बुजुर्गों और युवाओं की आबादी की जानकारी होने के बाद उनके लिए भी योजनाएं बनाना आसान हो जाता है।

एनपीआर से जुडी जानकारी

  • नागरिकता कानून 1955 और सिटीजनशिप रूल्स 2003 के प्रावधानों के तहत जनगणना रजिस्टर को तैयार किया जाता है।
  • सरकार को एनपीआर की वजह से योजनाओं को तैयार करने, हर परिवार तक स्कीमों का लाभ पहुंचाने और भ्रष्टाचार पर काबू पाने में मदद मिलती है।
  • “नागरिकता कानून 1955” को 2004 में संसोधित किया गया था। सरकार इस कानून के तहत राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी कर सकती है।
  • सरकार को इस कानून के तहत यह अधिकार प्राप्त है कि वह नागरिकों का अनिवार्य पंजीकरण कर नेशनल रजिस्टर तैयार सके।

एनपीआर का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है

  • आर्टिकल 14 के तहत एनपीआर में रजिस्ट्रशन को अनिवार्य किया गया है। नागरिकों के लिए इसके तहत पंजीकरण कराना जरूरी है।
  • पंजीकरण के लिए सरकारी कर्मचारियों को इस काम में लगाया जाता है। वे घर-घर जाकर डाटा जुटाने का काम करते हैं।
  • रजिस्टर तैयार करने के बाद इलेक्ट्रॉनिक डेटाबेस तैयार किया जाता है। इसके लिए फोटो ग्रॉफ और फिंगर प्रिंट्स जैसी चीजों को साथ में जोड़ा गया है।

एनपीआर (NPR) में पांच साल से अधिक उम्र के लोगों को शामिल किया जाएगा

  • एनपीआर में पांच साल से अधिक उम्र के लोगों को ही शामिल किया जाएगा। पांच साल से कम उम्र के बच्चों को इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया है।
  • नेशनल पॉलुलेशन रजिस्टर में परिवार के मुखिया का नाम, व्यक्ति का नाम, पिता, माता, पत्नी, पति का नाम दर्ज किया जाएगा।
  • घर का पता, मकान नंबर, अस्थायी पता, जन्मतिथि, लिंग, व्यवसाय दर्ज करने के साथ बॉयोमीट्रिक डिटेल्स को भी शामिल किया गया है।

एनपीआर से सम्बंधित गलत जानकारी देने पर होगा जुर्माना

  • एनपीआर के तहत खुद और परिवार से जुड़ी सभी जरूरी और सही जानकारी मुहैया कराना अनिवार्य है।
  • अगर कोई गलत जानकारी दर्ज कराता है तो सिटिजनशिप रूल्स 2003 के तहत जुर्माना अदा करना पड़ सकता है। इसका प्रावधान किया गया है।
  • जो लोग भारत के नागरिक नहीं है, उन्हें इस रजिस्टर में शामिल नहीं किया जाएगा। अगर कोई व्यक्ति बाहर से आकर यहां रह रहा है तो उसे शामिल किया जाएगा।
  • उस व्यक्ति से जुड़ी सभी जानकारी को दर्ज किया जाएगा। हालांकि सरकारी योजनाओं में उसे शामिल नहीं किया जाएगा।

एनपीआर (NPR) के तहत स्मार्ट कार्ड जारी हो सकता है

  • सरकार एनपीआर के तहत कई योजनाओं पर काम कर रही है। लोगों को इसके लिए नागरिकता कार्ड भी जारी किया जा सकता है।
  • भारत में फिलहाल इस तरह का कोई कार्ड जारी नहीं किया जाता है, जिसकी वजह से नागरिकता की पहचान की जा सके।
  • यह एक तरह का स्मार्ट कार्ड होगा, जिसे आधार के साथ लिंक किया जा सकता है। फिलहाल सरकार की तरफ इसे क्लियर नहीं किया गया है।
  • एनपीआर में डेमोग्राफिक डेटा, बॉयोमीट्रिक डेटा और आधार नंबर को शामिल किया जाएगा। नागरिकों की पहचान हो सकेगी।

एनपीआर का विरोध क्यों

एनपीआर को लेकर देशभर में विरोध हो रहा है। विपक्षी पार्टियों के साथ अल्पसंख्यक समुदाय के लोग सरकार की मंशा पर सवाल खड़े कर रहे हैं। उनका आरोप है कि सरकार एनपीआर के नाम पर एनआरसी कराना चाहती है। चूंकि अंतराष्ट्रीय स्तर पर भारत को एनआरसी को लेकर सफाई देनी पड़ रही है, इसलिए वह पहले एनपीआर ला रही है, ताकि इसके जरिए एनआरसी के मकसद को काफी हद तक पूरा किया जा सके। यूरोपीय यूनियन, यूनाइटेड नेशन, ओआईसी और अमेरिकन सीनेट तक में एनआरसी और सीए पर चर्चा हो चुकी है।

एनपीआर (NPR) को लेकर भारत सरकार का पक्ष

सरकार अपना पक्ष भी रख रही है। भारत सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। गृहमंत्री अमित शाह ने एनपीआर को सामान्य प्रक्रिया बताया है। उन्होंने यह भी दावा किया है कि एनपीआर की वजह से किसी की नागरिकता नहीं जाएगी। एनपीआर का मकसद देश के नागरिकों का एक रजिस्टर तैयार करना है, ताकि उन्हें सरकार की योजनाओं के तहत लाभांवित किया जा सके।

2011 में हुई जनगणना से सम्बंधित जानकारी

भारत में 2011 में जनगणना हुई थी। यूपीए सरकार ने इसको अमलीजामा पहनाया था। हालांकि तब इसको लेकर कोई विवाद नहीं हुआ था। किसी तरह का विरोध भी सामने नहीं आया था। फोटो, फिंगर प्रिंट जैसी प्रक्रिया को भी शामिल नहीं किया गया था। यह एक सामान्य प्रक्रिया थी, जो आसानी के साथ पूरी कर ली गई थी। अगली जनगणना 2021 में पूरी की जाएगी, जिसके लिए पूरी कवायद की जा रही है।

Anand Sivastava

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