डीबीटी योजना क्या है | लाभ | नियम व शर्ते की जानकारी

डीबीटी (DBT) योजना क्या है

भारत में डीबीटी योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया गया है। शहरी और ग्रामीण, दोनों इलाकों में रहने वालों को इस योजना का फायदा मिल रहा है। इसका मकसद सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता लाना तो है ही, लोगों को सुविधा प्रदान करना भी है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि डीबीटी व्यवस्था शुरू होने के बाद लोगों को आसानी हुई है। इस आर्टिकल में डीबीटी के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। इससे जुड़े हर पहलु को साझा किया जाएगा, ताकि लोगों की जानकारी में इजाफा हो सके।

डीबीटी का फुल फार्म |DBT Full Form

डीबीटी का फुल फार्म “डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर” योजना है। इसकी शुरुआत 2010 में हुई थी। 2012 में प्रदेश की सत्ता में आने के बाद समाजवादी पार्टी की सरकार में इसे बढ़ावा दिया गया था। सरकार की ज्यादातर योजनाओं को सीधे बैंक से जोड़ दिया गया था। 2014 में देश के प्रधानमंत्री बने नरेंद्र मोदी ने डीबीटी योजना की तारीफ की थी। उन्होंने इसके बाद केंद्र की ज्यादातर योजनाओं को भी सीधे बैंक से जोड़ने का आदेश दिया था। मौजूदा दौर में केंद्र और राज्य सरकारों की ज्यादातर योजनाओं को बैंक से जोड़ दिया गया है। लोगों को इसका लाभ मिल रहा है।

डीबीटी के फायदे | Benefits of DBT Scheme

डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर योजना के ढेर सारे फायदे हैं। इस योजना के तहत केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से संचालित योजनाओं के तहत मिलने वाली राशि को सीधे बैंकों में ट्रांसफर की जा रही है। जिन योजाओं के जरिए लोगों की आर्थिक मदद की जा रही है, डीबीटी का इसमें बड़ा योगदान है। पैसे सीधे बैंक खातों में पहुंच रहे हैं। लोग आसानी के साथ इन पैसों को हासिल कर रहे हैं।

1. खातों में पहुंच रही एलपीजी सब्सिडी

रसोई गैस पर मिलने वाली सब्सिडी की राशि भी अब सीधे बैंक खातों में भेजी जा रही है। सब्सिडी की रकम पहले गैस के दाम के साथ जुड़ी रहती थी। अब दोनों को अलग-अलग कर दिया गया है। लोगों को पहले पूरे दाम पर गैस दी जाती है, फिर सब्सिडी की राशि उनके बैंक अकाउंट में भेजी जाती है। यह काम डीबीटी योजना के तहत ही किया जा रहा है। इसमें शहरी और ग्रामीण, दोनों इलाकों में रहने वालों को शामिल किया गया है।   

2. किसान सम्मान निधि योजना

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को भी डीबीटी के साथ जोड़ दिया गया है। इस योजना के तहत किसानों को हर साल छह हजार रुपये दिए जाने का प्रावधान है। निधि के पैसे को किसानों के बैंक अकाउंट में भेजा जा रहा है। किसानों को इससे काफी राहत मिली है। उन्हें संबंधित विभागों के चक्कर नहीं काटने पड़ते हैं। खास बात यह है कि राशि ट्रांसफर होने के बाद मोबाइल पर इसका मेसेज भी भेजा जाता है, जिससे किसानों को इसकी जानकारी घर बैठे ही मिल जाती है।

3. दूसरी कई योजनाएं भी अटैच

उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी भत्ता, कन्या विद्याधन योजना, पढ़ें बेटियां, बढ़े बेटियां, महामाया पेंशन और समाजवादी पेंशन योजनाओं को भी बैंकों के साथ जोड़ दिया गया था। इन योजनाओं के तहत लोगों को कैश बेनिफिट देने का काम बैंकों के जरिए ही किया जाता था। आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, राजस्थान, उड़ीसा, गुजरात आदि प्रदेशों में ढेर सारी योजनाएं ऐसी हैं, जिन्हें डीबीटी के साथ जोड़ा गया था। वे सुचारू रूप से संचालित हो रही हैं। लोगों को इसका फायदा मिल रहा है।

4. डीबीटी का मकसद

डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर योजना का मकसद भ्रष्टाचार को खत्म करना है। सिस्टम में पारदर्शिता लाने के लिए ही डीबीटी को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार और लाभार्थी के बीच में अब किसी तरह के बिचौलिए काम नहीं कर पा रहे हैं। सरकार की तरफ से लोगों के बैंक खातों में पैसे भेजे जा रहे हैं। सरकार इसका पूरा रिकार्ड अपने पास रखती है। बैंकों के पास भी इससे संबंधित रिकार्ड होता है। इसमें किसी तरह के भ्रष्टाचार की गुंजाइश बची नहीं है। लोग बैंकों में पहुंचकर या फिर एटीएम, नेट बैंकिंग के माध्यम से अपने पैसों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

4. चेक से होता था वितरण

कैश बेनिफिट के लिए पहले भी ढेर सारी योजनाएं संचालित होती थी। लोगों को अलग-अलग योजनाओं के तहत नगद प्रदान किए जाते थे, लेकिन तब डीबीटी योजना शुरू नहीं हुई थी। लोगों को चेकों के जरिए लाभ पहुंचाए जाते थे। केंद्र और प्रदेश सरकारों की ओर से लोगों को चेक दिए जाते थे, जिन्हें वे किसी भी बैंक खातों में लगाकर पैसे हासिल करते थे। तब ज्यादातर लोगों के पास बैंक खाते ही नहीं थे। लोगों को इसके लिए कमीशन तक देना पड़ता था। चेक के लिए संबंधित विभाग के कर्मचारी भी घूस मांगते थे।

4. राष्ट्रीयकृत बैंकों में खाता जरूरी

डीबीटी के लिए बैंकों में खाता जरूरी है। खाता एसबीआई, बैंक ऑफ इंडिया, बीओबी आदि राष्ट्रीयकृत बैंकों में होना चाहिए। प्राइवेट बैंकों में खाता खुलवाने वालों को इससे बाहर रखा गया है। लोग अगर सरकार की किसी योजना का लाभ हासिल करना चाहते हैं तो उन्हें सबसे पहले बैंक में खाता खुलवाना होगा। योजनाओं के तहत खाता खुलवाने के लिए उन्हें कई तरह की छूट भी मिलेगी। उनके लिए न्यूनतम राशि की अनिवार्यता नहीं है। जनधन खातों के तहत भी खाते खुलवाए जा सकते हैं।

आधार से लिंक करा सकते हैं

बैंक खातों को आधार नंबर के साथ लिंक कराना जरूरी है। बैंक केवाईसी के तहत खातों को आधार के साथ लिंक कर रहे हैं। केंद्र और राज्य सरकारों की ज्यादातर योजनाओं को लाभ उन्हें मिल रहा है, जिनके खाते आधार के साथ लिंक हैं। लिहाजा जिन लोगों के खाते अभी आधार के साथ लिंक नहीं है, वे बैंकों में पहुंचकर इस औपचारिकता को आसानी के साथ पूरा कर सकते हैं।

Anand Sivastava