खसरा, खतौनी नंबर, जमाबंदी की जानकारी

भारत में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जो खसरा, खतौनी, जमाबंदी, अभिलेख, भूमि रिकार्ड जैसे नाम सुनकर चक्कर में पड़ जाते हैं। खासकर वे, जो किसी भी तरह की जमीन और मकान के मालिक नहीं है। यही वजह है कि इस आर्टिकल में इन शब्दों की उपयोगिता, जरूरत और अहमियत को समझाया जा रहा है। खसरा, खतौनी और जमाबंदी में अंतर क्या है, इसकी जानकारी भी विस्तार से साझा की जा रही है। इसको जानने के लिए आर्टिकल को अंत तक पढ़ें।   

जमाबंदी के लिए जरूरी तथ्य

जमाबंदी एक उर्दू शब्द है। इसे दस्तावेज और रिकार्ड भी कहा जा सकता है। यह एक ऐसा दस्तावेज है, जिसमें जमीन से संबंधित हर तरह की जानकारी मौजूद है। इसे भूमि रिकार्ड भी कहा जा सकता है, जिसमें जमीन की लोकेशन, उसकी लंबाई-चौड़ाई, मालिक का नाम, लैंड यूज आदि का जिक्र रहता है। लोकेशन के जरिए कोई भी व्यक्ति यह पता कर सकता है कि जमीन कहां पर स्थित है। इसमें ग्राम, मुहल्ला, तहसील, जिला और प्रदेश का जिक्र रहता है।

लैंड यूज क्या है

सरकार लैंड यूज यानी जमीन का उपयोग भी तय करती है। एक जमीन को आमतौर पर तीन तरह से उपयोग में लाया जा सकता है। एक जमीन वह होती है, जो सिर्फ रेसिडेंशियल यूज के लिए होती है। यानी इस जमीन पर मकान का निर्माण कराया जाता है, जहां लोग रह सकते हैं। इसी तरह एक जमीन वह होती है, जिसका कामर्शियल यूज होता है। यानी इस तरह की जमीन पर व्यवसायिक निर्माण, जैसे होटल, लॉज, मार्केट, दुकान, मॉल, शापिंग कांप्लेक्स आदि कराए जा सकते हैं। तीसरी तरह की जमीन वह होती है, जो सिर्फ खेती के इस्तेमाल के लिए होती है। यहां अनाज, सब्जी वगैरह उगाए जा सकते हैं। जमाबंदी में इन तथ्यों का जिक्र रहता है।

लंबाई और चौड़ाई

जमाबंदी में जमीन की लंबाई और चौड़ाई का जिक्र भी रहता है। यानी जमीन कुल कितने वर्ग गज, स्क्वायर फीट या फिर स्क्वायर मीटर में है। जमीन का फ्रंट कितना है। बैक साइड की चौड़ाई कितनी है। उदाहरण के तौर पर किसी का फ्रंट 26 स्क्वायर फीट और बैक 30 स्क्वायर फीट होता है तो किसी का फ्रेंट और बैक, दोनों की लंबाई और चौड़ाई एक जैसी रहती है। दस्तावेजों में इस तरह की डिटेलिंग इसलिए की जाती है, ताकि भविष्य में किसी तरह का विवाद न खड़ा हो। 

लोकेशन क्या है

जमाबंदी में जमीन की लोकेशन का जिक्र भी रहता है। जमीन किस इलाके में स्थित है, इसकी जानकारी दस्तावेजों में दर्ज की जाती है। यानी इसमें मुहल्ला, ग्राम, तहसील, जिला और प्रदेश को दर्शाया जाता है। रिकार्ड में इस तरह के तथ्य होने की वजह से जमीन मालिक को लंबे समय के बाद भी किसी तरह के विवाद का सामना नहीं करना पड़ता है। लोकेशन की वजह से लोगों को आसानी होती है।

मालिक का नाम

जमाबंदी में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य उसकी मिलकियत के साथ जुड़ा हुआ है। जमीन का मालिक कौन है, इसका जिक्र दस्तावेजों में किया जाता है। न सिर्फ मालिक, बल्कि उसके परिवार के सदस्यों के नाम भी दर्ज किए जाते हैं, ताकि भविष्य में दूसरे लोग मालिकाना हक के लिए दावा न ठोक सकें। एक जैसे नाम की संभावना के मद्देनजर दस्तावेजों पर मालिक के पिता के साथ दूसरी जरूरी चीजों को भी दर्ज किया जाता है। इस स्थिति में एक जैसे दो नाम को वैरिफाई किया जा सकता है।

खेती का उपयोग

जमीन को खेती के लिए भी वर्गीकृत किया जाता है। जमीन की मिट्टी कैसी है। किस तरह की खेती की जा सकती है। सब्जी उगाई जा सकती है या फिर अनाज के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। फलों के लिए किस तरह के पेड़ लगाए जा सकते हैं। इस तरह की तमाम चीजों का जिक्र दस्तावेजों में किया जाता है। इसका मकसद खेती को बढ़ावा देना तो है ही, किसानों को राहत पहुंचाना भी है। किसानों को यह तय करने में आसानी होती है कि वे किस तरह की खेती का चयन करें।

खसरा, खतौनी नंबर क्या है

जमाबंदी और जमीन की उपयोगिता को समझने के बाद खसरा और खतौनी नंबर के बारे में भी जानना जरूरी है। उदाहरण के तौर पर भारत में लाखों, करोड़ों लोगों के पास अपनी जमीन है। अब यह कैसे तय होगा कि कौन सी जमीन किसकी है? खासकर एक ऐसे खुले मैदान में, जहां अलग-अलग जमीन मालिक के नाम से ढेर सारे प्लॉट काट दिए गए हैं। रिकार्ड पर मालिक का नाम जरूर दर्ज है, लेकिन जमीन की पहचान कैसे होगी? जमीन की पहचान के लिए ही खसरा और खतौनी नंबर जारी किए जाते हैं।

खसरा और खतौनी में अंतर

ऐसे लोग भी हैं, जो खसरा और खतौनी को एक ही चीज समझते हैं। हालांकि दोनों में मामूली फर्क है, जिसे समझना बेहद जरूरी है। उदाहरण के तौर पर कोई व्यक्ति जब जमीन खरीदता है तो उसे खतौनी नंबर एलाट किया जाता है। मकान के निर्माण पर खसरा नंबर दिया जाता है। यानी अगर कोई व्यक्ति किसी की जमीन खरीदना चाहता है तो उसे खतौनी नंबर देखना पड़ेगा। इसी तरह अगर कोई व्यक्ति मकान खरीदना चाहता है तो उसे खसरा नंबर देखना पड़ेगा। खसरे में मकान मालिक का नाम और पता, दोनों दर्ज होता है। इस तरह यह समझा जा सकता है कि जमीन का संबंध खतौनी के साथ है और मकान का संबंध खसरा के साथ है।  

नक्शे की जरूरत पड़ती है

नुजूल विभाग, नगर निगम, नगर महापालिका, विकास प्राधिकरण, आवास विकास आदि ढेर सारे विभाग हैं, जो शहरों और जिलों के ग्रेड के हिसाब से काम करते हैं। नक्शा और खसरा, खतौनी नंबर के जरिए ही जमीन की पहचान की जाती है। मौके पर नक्शा का मुआएना किया जाता है। खसरा और खतौनी नंबर का मिलान किया जाता है। सबकुछ ठीक होने पर यह तय किया जाता है कि जमीन का मालिक कौन है और यहां किस तरह का निर्माण कराया जा सकता है।